शाहरुख की जीरो आज रिलीज हो गई एक लाइन में बता दूं. शाहरुख के फैंस के लिए खबर अच्छी भी है. और बुरी भी जीरो हास् आ ग्रेट कांसेप्ट है. लेकिन फिल्म ग्रेट या नहीं इस सवाल का जवाब यही है. कि धमाके के साथ शुरू होती है. यह फिल्म पहले 1 घंटे में हंसाती है. एंटरटेन करती है. लेकिन फिर धीरे-धीरे पटरी से उतर जाती है. ऐसा भी नहीं है. कुछ भी अच्छा नहीं है. अपने 26 साल के करियर में पहली बार चारों एक छोटे बच्चे आशिक बउआ सिंह के किरदार में है. बोना बुआ सिंह दिल जीतने वाला किरदार ह वो कद में छोटा है. लेकिन इसके लिए उसे अब्सोस नहीं उसे किसी की दया सिंपैथी नहीं चाहिए वह किसी से डरता नहीं अकड़ वाला है.
Zero Review
दिल फ़ेंक रोमांटिक करैक्टर है. और बढ़िया डायलॉग भी मारता है. एक शब्द में कहा शाहरुख जैसे के लिए हिम्मत भरा रोल है. जे कहना सही होगा इसमें शाहरुख खान बुआ सिंह नहीं बने बल्कि उन्होंने चार फुट बुआ का कद बढ़ा कर उसे शाहरुख खान बना दिया है. लेकिन शाहरुख़ पूरी फ़िल्म को संभालने के लिए काफी इसका जवाब है. नहीं फिल्म एक घंटा बाद जिसमे सारे करैक्टर को परिचय किया जाता है. जहां मेरठ में कहानी की शुरुआत होती है. वो बहुत एंटरटेन है. फिर बुआ सिंह मेरठ से निकलता है. और इसके साथ ही फिल्म भी बिखरती चली जाती है. और आखिर तक आते आते बड़ा वोशील हो जाती है. कि मनोरंजक पहले हाफ के असर को भी खत्म कर देती है. जीरो की कहानी भी जान लेते है. कहानी है. मेरठ के रहने वाले 38 साल के बोने बुआ सिंह की बुआ के पिता अमीर है.और वह अपने दोस्त गुड्डू के साथ मेरठ की सड़कों पर दिन भर मस्ती करता है. बुआ फिल्मस्टार बबीता का फैन है. तभी उसकी मुलाकात आफिया नाम की बड़ी साइंटिस्ट यानि अनुष्का से होती है. आफिया व्हीलचेयर पर है. वो चल नहीं सकती और ठीक से बोल भी नहीं सकती लेकिन दोनों को प्यार हो जाता है. और बात शादी तक पहुंच जाती है. लेकिन शादी के दिन ही फिल्म स्टार बबीता यानी कैटरीना कैफ मेरठ पहुंच जाती है. और फिर तो सबकी दुनिया हिल जाती है. जे है. जीरो की कहानी का ट्विस्ट फिर मेरठ का दिल फेंक आशिक बुआ सिंह अपने इसके लिए प्यार के लिए मंगल ग्रह तक चला जाता है. यह है. जीरो की कहानी का ट्विस्ट और शाहरुख़ की कॉमेडी वाला अंदाज देना हो या मंगल ग्रह वाला ट्विस्ट हो फिर फिल्म की रफ्तार धीमी पड़ जाती है. कॉमेडी खत्म हो जाती है. फिल्म के सभी कलाकार का रोल दमदार है. जे फ़िल्म उम्मीद पर खरी नहीं होती है. जीरो के सेकंड हाफ बेहद निराश करता है. सभी कलाकारों के रोल दमदार है. और हम इस फ़िल्म को 2.5 स्टार देते है.